24 अक्टूबर 2009

क्या ओबामा सही में 'शांति दूत' है।




1994 में जब फिलीस्तीनी नेता यासिर आराफात को शांति का नोबेल मिला था तो माखौल उङा था कि ‘ क्या इस बार पुरस्कार के लिए हत्यारा होना शर्त थी’। मगर इस बार ‘क्या सिर्फ बातें और कुछ वादें´ काफी थे।
नोबेल कमेटी ने अमेरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को वर्ष 2009 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह पुरस्कार पाने वाले वह अमरीका के चौथे राष्ट्रपति है। इसके पीछे उन्होनें ओबामा के पिछले एक साल के काम की वकालत की है जिसमें उन्होनें दुनिया को परमाणु हथियार रहित और फिलिस्तीन और इज़राइल में अमन बढ़ाने की बातों का ज़िक्र किया है।
ओबामा ने 20 जनवरी 2009 को राष्ट्रपति पद की शपत ली थी। पुरस्कार के नाम लेने कि अंतिम तारीख 11 फरवरी थी। यानि केवल 11 दिन के कार्यकाल के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। अगर हम इस बात को भी दरकिनार कर दें तब भी जब जून में निर्णायकों ने अपने मत दिए थे, उनके कार्यकाल को केवल 4 माह ही हुए थे। हो सकता है काहिरा में उनके द्वारा ‘अस्लाम वालेकुम’ कहना कमेटी को असाधारण लगा हो।
एक ऐसे देश के राष्ट्रपति को नोबेल दिया जाना जो 2 देशों में जंग लङ रहा हो बेमानी लगता है। ओबामा अफगानिस्तान से सेना बुलाने के अपने फैसले पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे सके। परमाणु रहित दुनिया की बात करने वाले ओबामा जिस देश के राष्ट्रपति है उसके पास ही दुनिया का सबसे बङा परमाणु भंडार है। उस भंडार को कम करने के उन्होंने कितने प्रयास किए। अगर सिर्फ बातों और वादों पर ही नोबेल मिलना था तो भारत के सभी नेता इसके हकदार थे।
हो सकता हे नोबेल कमेटी ओबामा को खुश करना चाहती हो या हो सकता हे कि यह उनकी विवशता रही हो। जिस छवि के साथ ओबामा राष्ट्रपति बने थे वह लगातार गिर रही थी। इसकी एक ताज़ा कङी हे 2016 के ओलंपिक की मेज़बानी जिसे वह अमेरिका को दिलाने में नाकाम रहे। अपनी लगातार गिरती छवि को फिर से मंच प्रदान करने का सबसे सही मौका था। ये भी हो सकता हे कि कमेटी नोबेल पुरस्कार देकर ओबामा पर विश्व शांति का दबाव बढाना चाहती हो।
ऐसा नहीं हे कि ओबामा ने विश्व शांति के लिए कोई काम नहीं किया। उनके काम सराहनीय है। मगर उनमें अभी भी ज़मीनी हकीकत नज़र नहीं आति। मगर इसमें भी कोई दो राय नहीं कि ओबामा को नोबेल देने में जल्दबाज़ी की गई है। ओबामा को यह पुरस्कार मिल तो गया हे मगर अब उन्हें यह हासिल करके दिखाना होगा।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आप का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, हमने नया चिटठा "चर्चा पान की दुकान पर" प्राम्भ किया है, चिट्ठे पर आपका स्वागत है.

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  2. बिलकुल सही कहा आपने, ओबामा को कमेटी ने सिर्फ उनके भाषणों के आधार पर पुरस्कार दिया है, कमाल है यही सोच कर भारत की तरफ रुख करते तो हर नेता को पुरस्कार मिल चुका होता

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  3. Might is Right
    जिसकी लाठी उसकी भैंस
    अच्छे लेख के लिए बधाई ।

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